Why Travel to Kailash Mansarovar Yatra

|| कैलाश मानसरोवर यात्रा ||

कैलाश पर्वत, हिमालय पर्वत में तिब्बत के दूरदराज के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित है। 6638 मीटर (21778 फीट) ऊंचाई पर यह हिमालय के सबसे ऊंचे हिस्से में से एक है और एशिया की सबसे लंबे नदियों का स्रोत भी है। कैलाश एक अनमोल और प्रमुख पर्वत है, जो की काली चट्टानों से बना हुआ एक अद्भुत हीरे के आकार के भांति प्रतीत होता है जो की खूबसूरत परिदृश्य से घिरा हुआ है।

कैलाश यात्रा एक अनूठी ऐसी यात्रा है जिसमें व्यक्ति को हर तरह की परिस्तिथिओ से लड़ने और उनको सहने की शक्ति प्रपात होती है। कुछ श्रद्धालु हर चीज़ में नुक्स और कमिया निकलते हुए अपनी यात्रा को व्यर्थ में ख़राब कर देते है और कुछ भगवन शिव के ऐसे अनूठे भक्त जिनको दुनिया दारी से कोई वास्ता ही नहीं होता।

कैलाश यात्रा का सही मतलब है आत्मा का परमात्मा से मिलन है। यह यात्रा नेपाल व् तिब्बत के सबसे दुर्गम इलाको में से हो कर गुजरती है मानिये कुछ ऐसा की एक यात्रा में आपको पुरे जीवन का आइना देखने को मिल गया हो। कैलाश यात्रा को सही रूप से करने वाला वही है जो दुनिया से सब मोह माया त्याग कर केवल अपने शिव शम्भू, भोले भंडारी का जाप करता हुआ मग्न होकर आगे बढ़ता जाये।

ऐसे तो कैलाश यात्रा करने के अनेक रास्ते है, अब जहां चाह वहा राह लेकिन काठमांडू, लखनऊ, नाथुला एवं उत्तराखंड। लेकिन काठमांडू व् लखनऊ द्वारा सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते है। तकरीबन 16000 यात्री, यात्रा अभिकर्तों द्वारा इस यात्रा में भाग लेते है। यह एक सबसे आसान एवं सबसे छोटा मार्ग है, जिसके जरिये यात्री अपने लक्ष्यों की प्राप्ति आसानी से कर सकते है। किन्तु, ख़राब मौसम और कुछ ऐसे कारण जो मानवीय नियंत्रण से परे है, नेपाल द्वारा भी श्रधालुओं को अनेको कठनाईओं का सामना करना पड़ता है।

नेपाल के रास्ते से श्रद्धालु बस एवं हेलीकॉप्टर द्वारा इस यात्रा में भाग ले सकते है। आराम व् सुविधाओं के साथ हेलीकाप्टर द्वार नेपालगंज, सिमिकोट, हिलसा, तकलाकोट के रास्ते कैलाश एवं मानसरोवर के दर्शन किये जा सकते है या फिर अगर चाहिए कुछ ऐसा की जो सस्ता और टिकाऊ हो तो दूसरा रास्ता है काठमांडू से रसुआगढ़ी, केयरोंग, सागा, प्रयांग और फिर कैलाश मानसरोवर जिसमे कम खर्चा आता है और बस द्वारा आप पूरी यात्रा आसानी से कर सकते है।